JAI SHRI RAM
KARPUR AARTI
कर्पुर आरती

कर्पुरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम ।
सदावसन्तं हृदायरबिन्दे भवं भवानी सहितं नमामि ।।
मन्दारमालं कुलितालिकाय । कपालमाला कितकंधराय।
दिव्यांबराय च दिगम्बराय । नमः शिवायै च नमः शिवाय ।।
घालीन लोटांगण, वंदीन चरण।
डोळ्यांनी पाहीन रुप तुझें ।
प्रेमें आलिंगन, आनंदे पूजिन।
भावें ओवाळीन म्हणे नामा ।
त्वमेव माता च पिता त्वमेव।
त्वमेव बंधुक्ष्च सखा त्वमेव ।
त्वमेव विध्या द्रविणं त्वमेव ।
त्वमेव सर्वं ममदेव देव ।
कायेन वाचा मनसेंद्रीयैर्वा,
बुद्धयात्मना वा प्रकृतिस्वभावात ।
करोमि यद्यत्सकलं परस्मै,
नारायणायेति समर्पयामि
अच्युतं केशवं रामनारायणं
कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं,
जानकीनायकं रामचंद्र भजे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे ।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।।
हिंदी में अर्थ : -
कर्पुरगौरं - कर्पुर के सामान गोरे रंग वाले
करुणावतारं - करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं
संसारसारं - जो समस्त सृष्टि के मूल तत्त्व है
भुजगेन्द्रहारम - जो सांप को हार के रूप में धारण किये हुए हैं
सदावसन्तं हृदायरबिन्दे भवं भवानी सहितं नमामि - वो भगवन शिव जो माता पार्वती जी के साथ सदैव मेरे ह्रदय में निवास करते हैं , उनका मेरा नमन हैं