top of page
JAI SHRI RAM
SUKHKARTA DUKHHARTA
सुखकर्ता दुखहर्ता

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नांची।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची ।।
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची।।
जय देव, जय देव ।
जय मंगलमूर्ती श्री मंगलमूर्ती ॥ १॥
दर्शनमात्रे मन कामना पुरती ॥धृ॥ जय देव, जय देव
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा ।।
हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा।
रुणझुणती नूपुरे, चरणी घागरिया।।
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती ॥ २॥ जय देव, जय
देव लंबोदर पीतांबर, फणिवरबंधना।
सरळ सोंड, वक्रतुंड त्रिनयना।।
दास रामाचा, वाट पाहे सदना।
संकटी पावावे, निर्वाणी रक्षावे, सुरवरवंदना ।।
जय देव जय देव, जय मंगलमूर्ती |
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती ॥3॥
जय देव, जय देव
bottom of page