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JAI SHRI RAM

CHHATRAPATI
SHIVAJI MAHARAJ GHOSNA

छत्रपति शिवाजी महाराज घोषणा (हिंदी अर्थ सहित)

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"आस्ते कदम... आस्ते कदम... आस्ते कदम महाराsssssज... 

गडपती, गजअश्वपती, भूपती, प्रजापती, सुवर्णरत्नश्रीपती, अष्टवधानजागृत, अष्टप्रधानवेष्टित, न्यायालंकारमंडित, शस्त्रास्त्रशास्त्रपारंगत, राजनितिधुरंधर, प्रौढप्रतापपुरंदर, क्षत्रियकुलावतंस, सिंहासनाधिश्वर, महाराजाधिराज, राजा शिवछत्रपती महाराजांचा विजय असो!!!

​हिंदी में अर्थ : -

गडपती - राज्य के जितने भी गड किले है उन सभी पर शासन करने वाला राजा |

गजअश्वपती - एक राजा जिनके पास खुद के हाथी और घुड़सवार हैं | (उस समय हाथी को वैभव का प्रतिक माना जाता था | अतः हम कह सकते हैं कि गजश्वपति शब्द वैभव का प्रतिक है |)

भूपती प्रजापती - वास्तविक राज्याभिषेक का अर्थ होता है की उस शासक का भूमि से विवाह| अर्थात वह महाराज जिन्होंने राज्य की भूमी सुर प्रजा के पति का पद स्वीकार किया है और उन महाराज का सर्वप्रथम कर्त्तव्य है उस भूमि की पूर्ण रक्षा करना और वहां की जनता का पालन पोषण करना |

सुवर्णरत्नश्रीपती- राज्य के खजाने में विभिन्न हीरे , माणिक , मोती और सोने (स्वर्ण ) पर प्रभुत्व रखने वाला राजा| (शिवाजी महाराज ३२ मन स्वर्ण सिंहासन के शासक थे | ) इस प्रकार वो राजा जिनके खाने में विभिन्न हीरे , माणिक मोती और स्वर्ण हो , और वो राजा इन खजानों का मालिक हो , उन्हें कहा जाता है सुवर्णरत्नश्रीपती|

अष्टवधानजागृत - १ पहर में तीन घंटे होते है , इस प्रकार राजा ८ पहर मतलब २४ घंटे जागृत रहे , यानी वो कुछ घंटे सो भी रहे हो , तन भी उन्हें सतर्क रहना चाहिए , क्योंकि शत्रु कभी भी आ सकता है| ) और इसके साथ ही आठ दिशा यानी उत्तर , ईशान्य , पूर्व , आग्नेय , दक्षिण नैऋत्य , पश्चिम और वायव्य| इस प्रकार जो महाराज जो पुरे आठ पहे जागते है और राज्य की सभी आठ दिशाओं को देखते हैं उन्हें कहते है अष्टवधानजागृत|

अष्टप्रधानवेष्टित - महाराज जिनके आठ प्रधान मंत्री है , जो प्रत्येक शास्त्र में पारंगत है और जो राज्य का प्रशासन चलने में उनसे सलाह लेते हैं| इस प्रकार शिवराय ने राज्य का शासन चलने के लिए अष्टप्रधान मंडल की स्थापना की थी | वे ८ मंत्री होते है - आमात्य , सचिव , मंत्री , सेनापति , सुमंत , पंडितराव, न्यायधीश , पंतप्रधान |

न्यायालंकारमंडित - सत्य और न्याय के पक्ष में निर्णय देने वाले , कर्तव्यपरायण और विवेकशील महाराज | सत्य और न्याय के लिए (कर्तव्यकठोर ) जो काम करना है , वो दृढ़ता से करना है | और (न्यायकठोर) जो न्याय के लिए निर्णय लेना है वो सक्ती से लेना है | उसके लिए संकोच या भय नहीं होना चाहिए |

शस्त्रास्त्रशास्त्रपारंगत - एक महाराज जो सभी प्रकार के शस्त्र और शास्त्र में पारंगत हो | छत्रपति शिवाजी महाराज शस्त्र में पारंगत थे साथ ही शास्त्रों में भी निपुण थे |

राजनितिधुरंधर - एक आदर्श शासक की तरह राजनीती और रणनीति में कुशल राजा| सही मायनों में छत्रपति शिवाजी महाराज राजनीती में धुरंधर तो थे ही , लेकिन छापामार युद्ध से शत्रु को नामोहरम करने में महाराज निपुण थे |

प्रौढप्रतापपुरंदर - वह महाराज जिन्होंने महान वीरता का प्रदर्शन करके अपने पराक्रम की छाप छोड़ी | छत्रपति शिवाजी महाराज ने कई युद्ध जीते और स्वराज्य की स्थापना की |

क्षत्रियकुलावतंस - क्षत्रिय कुल में जन्मे , और उस कुल का नाम रोशन करने वाले महाराज |

सिंहासनाधिश्वर - जैसे मंदिर में भगवान् होते है जिन्हें (अधीश्वर - राजा) भी कहते हैं | उसी तरह ३२ मण स्वर्ण सिंहासन को सुशोभित करते हुए सिंहासन के अधीश्वर , हमारे महाराज दिखाई देते हैं| छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने राज्याभिषेक के लिए ३२ मण का सिंहासन बनवाया था | 

महाराजाधिराज - सभी मौजूदा राजाओं में जो सबसे महान राजा है और सभी राजाओं ने जिनके अधीन रहना स्वीकार किया है|

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