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JAI SHRI RAM

MADHURASHTRAKAM

मधुराष्टकं  (हिंदी अर्थ सहित)

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अधरम् मधुरम् वदनम् मधुरम्  

नयनम् मधुरम् हसितम् मधुरम् ।। 

ह्रदयम् मधुरम् गमनम् मधुरम् 

मधुराधिपते रखिलम् मधुरम् ।। १ 

वचनम् मधुरम् चरितम् मधुरम्  

वसनम् मधुरम् वलितम् मधुरम् ।। 

चलितम् मधुरम् भ्रमितम् मधुरम् 

मधुराधिपते रखिलम् मधुरम् ।। २ 

वेनुर्मधुरो ​रेणु र्मधुर: 

पाणिर्मधुर: ​पादौ मधुरौ  ।।

नृत्यम् मधुरम् सख्यम् मधुरम् 

मधुराधिपते रखिलम् मधुरम् ।।३ 

गीतम् मधुरम् पीतम् मधुरम्

भुक्तम् मधुरम् सुप्तम् मधुरम्


रूपम् मधुरम् तिलकम् मधुरम्

मधुराधिपते रखिलम् मधुरम् ॥४॥

करणम् मधुरम् तरणम् मधुरम्

हरणम् मधुरम् रमणम् मधुरम्


वमितम् मधुरम् शमितम् मधुरम्

मधुराधिपते रखिलम् मधुरम् ॥५॥

गुञ्जा मधुरा माला मधुरा

यमुना मधुरा वीची मधुरा ।


सलिलम् मधुरम् कमलम् मधुरम्

मधुराधिपते रखिलम् मधुरम् ॥६॥

गोपी मधुरा लीला मधुरा

युक्तम् मधुरम् मुक्तम् मधुरम्


दृष्टम् मधुरम् सृष्टम् मधुरम्

मधुराधिपते रखिलम् मधुरम् ॥७॥

गोपा मधुरा गावो मधुरा

यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।


दलितम् मधुरम् फलितम् मधुरम्

मधुराधिपते रखिलम् मधुरम् ॥८॥

​हिंदी में अर्थ : -

अधरम् मधुरम् - आपके होंठ मधुर है 

वदनम् मधुरम् - आपका मुख मधुर है  

नयनम् मधुरम् - आपकी आँखें मधुर है 

हसितम् मधुरम् - आपकी मुस्कान मधुर है  

​​

ह्रदयम् मधुरम् - आपका ह्रदय मधुर है 

गमनम् मधुरम् - आपका जाना भी मधुर है 

मधुराधिपते - मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण 

 रखिलम् मधुरम् - आपका सब कुछ मधुर है

वचनम् मधुरम् - आपका बोलना मधुर है 

चरितम् मधुरम् - आपके चरित्र मधुर है 

वसनम् मधुरम् - आपके वस्त्र मधुर है 

वलितम् मधुरम् - आपका तिरछा खड़ा होना मधुर है

​​​

चलितम् मधुरम् - आपका चलना मधुर है 

भ्रमितम् मधुरम् - आपका घूमना मधुर है 

मधुराधिपते - मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण 

रखिलम् मधुरम् - आपका सब कुछ मधुर है 

वेनुर्मधुरो - आपकी बांसुरी मधुर है ​

रेणु र्मधुर: - आपके लगाए हुए पुष्प मधुर है 

पाणिर्मधुर: - आपका हाथ मधुर है 

​पादौ मधुरौ - आपके चरण मधुर है

​​

नृत्यम् मधुरम् - आपका नृत्य मधुर है 

सख्यम् मधुरम् - आपकी मित्रता मधुर है 

मधुराधिपते - मधुरता के ईश हे श्री कृष्ण

रखिलम् मधुरम् - आपका सब कुछ मधुर है 

गीतम् मधुरम् - आपके गीत मधुर है 

पीतम् मधुरम् - आपका पीना मधुर है 

भुक्तम् मधुरम् - आपका खाना मधुर है 

सुप्तम् मधुरम्  - आपका सोना मधुर है 


रूपम् मधुरम् - आपका रूप मधुर है 

तिलकम् मधुरम् - आपका टीका मधुर है 

मधुराधिपते - मधुरता के ईश हे श्री कृष्ण

रखिलम् मधुरम् - आपका सब कुछ मधुर है॥४॥

करणम् मधुरम् - आपके कार्य मधुर है 

तरणम् मधुरम् - आपका तैरना मधुर है 

हरणम् मधुरम् - आपका चोरी करना मधुर है 

रमणम् मधुरम् - आपका प्यार करना मधुर है 


वमितम् मधुरम् - आपके शब्द मधुर है  

शमितम् मधुरम् - आपका शांत रहना मधुर है 

मधुराधिपते - हे मधुरता के ईश 

रखिलम् मधुरम् - आपका सब कुछ मधुर है ॥५॥

गुञ्जा मधुरा - आपकी घुंघची मधुर है 

माला मधुरा - आपकी माला मधुर है 

यमुना मधुरा - आपकी यमुना मधुर है 

वीची मधुरा - उसकी लहरें मधुर है ।


सलिलम् मधुरम् - उसका पानी मधुर है 

कमलम् मधुरम् - उसके कमल मधुर है 

मधुराधिपते - मधुरता के ईश हे श्रीकृष्ण 

रखिलम् मधुरम् - आपका सब कुछ मधुर है ॥६॥

गोपी मधुरा - आपकी गोपियाँ मधुर है 

लीला मधुरा - आपकी लीला मधुर है 

युक्तम् मधुरम् - आप उनके साथ मधुर है 

मुक्तम् मधुरम् - आपके उनके बिना मधुर है 


दृष्टम् मधुरम् - आपका देखना मधुर है 

शिष्टम् मधुरम् - आपकी शिष्टता मधुर है 

मधुराधिपते - मधुरता के इस हे श्री कृष्णा 

रखिलम् मधुरम्  - आपका सब कुछ मधुर है॥७॥

गोपा मधुरा - आपके गोप मधुर है 

गावो मधुरा - आपकी गाय मधुर है 

यष्टिर्मधुरा - आपकी छड़ी मधुर है 

सृष्टिर्मधुरा  - आपकी सृष्टी मधुर है।


दलितम् मधुरम् - आपका विनाश करना मधुर है 

फलितम् मधुरम् - आपका वर देना मधुर है 

मधुराधिपते - मधुरता के ईश हे श्री कृष्णा 

रखिलम् मधुरम्  - आपका सब कुछ मधुर है॥८॥

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