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JAI SHRI RAM
SHENDUR LAAL CHADHAYO
शेंदुर लाल चढ़ायो

शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को।
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरीहर को।।
हाथ लिए गुडलड्डू साई सुरवर को।
महिमा कहे न जाय लागत हूँ पद को ॥१॥
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता।
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता ॥ ध्रु०॥जय देव जय देव ।।
अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरि।
विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी ।
कोटी सूरजप्रकाश ऐसी छबि तेरी।
गंडस्थल मदमस्तक झूले शशि बिहारी।।
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता।
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता , जय देव जय देव ।।
भावभगत से कोई शरणागत आवे ।
संतत संपत सबही भरपूर पावे।
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे।
गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे ।।
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता।
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता।।
जय देव जय देव ।।
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